बरसात ने तो सारी धुंध ही हटा दी
बचपन की बीती याद दिला दी
बेफिकर शामें और मां की हाथ की चाय
थोड़े से थपपड़ और थोड़ी सी डांट
कुछ पढ़ ले, कुछ लिख ले वाली बातें
मेरा राजा, मेरा बच्चा वाली दुलारें
बेगानी सी लगती हैं अब अपनी अाजादी की बातें
हाथ थक गए माँ आके इनको सहला दे
इस बरसात में फिर से आज भिगा दे |
Picture credits: Claro: Photographs by Nitin & Jyoti

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