Wednesday, August 24, 2016

आज फिर से भिगा दे



बरसात ने तो सारी धुंध ही हटा दी
बचपन की बीती याद दिला दी

बेफिकर शामें और मां की हाथ की चाय
थोड़े से थपपड़ और थोड़ी सी डांट
कुछ पढ़ ले, कुछ लिख ले वाली बातें
मेरा राजा, मेरा बच्चा वाली दुलारें


बेगानी सी लगती हैं अब अपनी अाजादी की बातें
हाथ थक गए माँ आके इनको सहला दे
इस बरसात में
फिर से आज भिगा दे |




Picture credits: Claro: Photographs by Nitin & Jyoti