Friday, May 25, 2012

आओ चलें..

चलो चलते हैं कहीं..
बहुत दूर नहीं, यहीं कहीं..

जहाँ अपने सारे साथ हों,
खुशियाँ ही खुशियाँ हों जहाँ,
चेहरों पे सिर्फ मुस्कान हो...

हाँ लगती तो है सपनो की दुनिया जैसी,
लेकिन चलो मिलके ये जिंदगी सजाते हैं...

सब अपनों को पास बुलाते हैं,
आओ सबको पास बिठाते हैं,
हँसते हैं, खिलखिलाते हैं
और सबको गले लगाते हैं,

चलो मिलके ये जिंदगी सजाते हैं...


                                               (05/25/2012)

Monday, May 21, 2012

मेरी पहचान..

उससे ही तो है होने का अहसास
जिस पल छूटे, है सब कुछ उदास
वो है तो खुद को पहचाना
चन्दा की ठंडक को ओढा और सूरज की तपन से नहाया
वो है तो फूलों की खुशबू को जाना
हर गूंज को सुन पाया और हर रंग को देख पाया
ऐ जिंदगी तू ही तो है...
तू ही तो जोड़े है सबको
आँसू देती तो कभी हंसती हमको
तू ही तो दिलाती है होने का अहसास
जो तू नहीं तो है सब कुछ उदास
ऐ जिंदगी तू ही तो है..

Sunday, May 20, 2012

एक छोटी सी कहानी...

मिट्टी की परतों से बनी हूँ मैं
फिर भी है सबको मुझपे कितना भरोसा

सपने दिए मुझे कितने सारे

लगाया अपने दिल से कई बार
मुझको सर आँखों पे चढ़ाया

हालाँकि सपने बदलते रहे हर दिन...


लेकिन खुश थी मैं, सपने सँजोने में उनके

फक्र हुआ हर खुद पे हर बार
जब जब उन्होंने मुझे अपने हाथों में जोर से थामा

उन्हें डर था,

की कहीं मैं बिखर न जाऊं
सपने सारे कहीं टूट न जाएँ

लेकिन उनके भरोसे को टूटने देना न था

न ही टूटने दिया मैंने...
खुश थी मैं, सपने सँजोने में उनके

आज एक धमक से भले ही मुझे टुकड़े टुकड़े कर दिया

लकिन उस एक मुस्कान से मेरा अस्तित्व सफल कर दिया..

यही हूँ मैं,

सपनो से भरी,
मिट्टी की परतों से बनी..

यही है मेरी छोटी सी कहानी..एक गुल्लक की कहानी !!