Saturday, June 14, 2014

बचपन

अभी अभी बचपन को देखा 
हँसते और खिलखिलाते देखा 

शाम तो कब की ढल चुकी मगर 
उसको फिर से जगमगाते देखा!

वाकई में अदभुत था वो नज़ारा 
खुशियों का छोटा सा पिटारा 

ना ही रूप रंग का भेद वहां 
ना ही लड़के लड़की का फर्क वहां 

सुन्दर, पवित्र, चिंता मुक्त  
ऐसा फिर से बचपन देखा!

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